सकलडीहा/चंदौली।लोक मीडिया। मान्यताओं के अनुसार इस दिन को नए फल और नए ऋतु के आगमन के लिए मनाया जाता है। जब सूर्य देव मकर राशि पर प्रवेश करते हैं तब मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है ।इस दिन लाखों श्रद्धालु गंगा और अन्य पावन नदियों के तट पर स्नान और दान धर्म करते हैं। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन भगवान विष्णु ने पृथ्वी लोक पर राक्षसों का वध कर उनके सिरों को काटकर मंदिरा पर्वत पर गाड़ दिया था। तभी से भगवान विष्णु की इस जीत को मकर संक्रांति पर्व के तौर पर मनाया जाने लगा। वही माना जाता है कि भगवान श्री कृष्ण ने कहा था कि जो मनुष्य इस दिन अपने देह को त्याग देता है , उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। वहीं इस वर्ष मकर संक्रांति का त्योहार 14 जनवरी को मनाया जाएगा । मकर संक्रांति का त्यौहार देखते हुए शहर के विभिन्न इलाके में पर्व को लेकर दुकानदारों ने अपने- अपने दुकानों को तरह-तरह के तिलकुट व पतंगों के साथ कई खाद्य पदार्थों के द्वारा दुकानों को सजा लिया है। लेकिन कोरोना महामारी के चलते यह त्यौहार भी फीका नजर आ रहा है। वहीं दुकानदारों का कहना है कि पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष अन्य त्यौहारों जैसा इस त्यौहार पर भी बाजार में मंदी नजर आ रहा है। जिससे हम सभी को काफी नुकसानो का सामना करना पड़ रहा है। । दिल से ग्राहक खरीदारी कम कर रहे हैं। स्थानीय क्षेत्र के बाजारों में चीनी- गुड़ के तिलकुट के अलावा रामदाना , तिलकुट ,तिलपट्टी , बदाम पट्टी और लाई ग्राहकों के लिए उपलब्ध है ।इस बार तिलकुट व लाई के कीमतों में बढ़ोतरी नहीं हुई है। बाजार में तिलकुट के भाव पिछले साल वाले ही हैं। वही दुकानदारों का कहना है कि इस बार बाजार डाउन है । दुकानदार गोपाल गोड़ ने बताया कि इस बार दाम भी निकालना मुश्किल हो जाएगा। और कि कोरोना का असर तिलकुट बाजार पर भी पड़ा है। लोग कोरोना संक्रमण के भय से खरीदारी करने दुकान नहीं पहुंच रहे हैं।
0 Comments