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भाजपाइयों ने मनाया श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान दिवस

लोकपति सिंह (जिला संवाददाता)
चकिया नगर स्थित वार्ड नंबर 5 में भाजपा जिला महामंत्री उमाशंकर सिंह के आवास पर मंगलवार की दोपहर में एकत्रित होकर भाजपा मंडल अध्यक्ष राघवेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में भाजपा पदाधिकारियों ने डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के तैल्य चित्र पर पुष्पहार अर्पित करते हुए श्रद्धांजलि व्यक्त की एवं उनके राजनीतिक जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनके द्वारा किए गए कार्यों की सराहना की व उनके  बताए गए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया 

 भाजपा जिला महामंत्री ने बताया कि डॉ॰ श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने स्वेच्छा से अलख जगाने के उद्देश्य से राजनीति में प्रवेश किया। डॉ॰ मुखर्जी सच्चे अर्थों में मानवता के उपासक और सिद्धान्तवादी थे। उन्होने बहुत से गैर कांग्रेसी हिन्दुओं की मदद से कृषक प्रजा पार्टी से मिलकर प्रगतिशील गठबन्धन का निर्माण किया। इस सरकार में वे वित्तमन्त्री बने। इसी समय वे सावरकर के राष्ट्रवाद के प्रति आकर्षित हुए और हिन्दू महासभा में सम्मिलित हुए।

मंडल अध्यक्ष राघवेंद्र प्रताप सिंह संतोष  ने डॉक्टर  श्यामा प्रसाद मुखर्जी  के राजनीतिक जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया  कि मुस्लिम लीग की राजनीति से बंगाल का वातावरण दूषित हो रहा था। वहाँ साम्प्रदायिक विभाजन की नौबत आ रही थी। साम्प्रदायिक लोगों को ब्रिटिश सरकार प्रोत्साहित कर रही थी। ऐसी विषम परिस्थितियों में उन्होंने यह सुनिश्चित करने का बीड़ा उठाया कि बंगाल के हिन्दुओं की उपेक्षा न हो। अपनी विशिष्ट रणनीति से उन्होंने बंगाल के विभाजन के मुस्लिम लीग के प्रयासों को पूरी तरह से नाकाम कर दिया। 


भाजपा सेक्टर प्रभारी  दिव्या जायसवाल ने उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि देते हुवे  कहा कि
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी एक देशभक्त और स्वाभिमानी राष्ट्रवादी थे और उन्होंने भारत की एकता और अखंडता के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया था। एक मजबूत और एकजुट भारत के लिए उनका जुनून हमें प्रेरित करता है और हम सभी को 130 करोड़ भारतीयों की सेवा करने की ताकत देता है।

युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष संदीप गुप्ता आशु ने कहा कि डॉ॰ मुखर्जी इस धारणा के प्रबल समर्थक थे कि सांस्कृतिक दृष्टि से हम सब एक हैं। इसलिए धर्म के आधार पर वे विभाजन के कट्टर विरोधी थे। वे मानते थे कि विभाजन सम्बन्धी उत्पन्न हुई परिस्थिति ऐतिहासिक और सामाजिक कारणों से थी। वे मानते थे कि आधारभूत सत्य यह है कि हम सब एक हैं। हममें कोई अन्तर नहीं है। हम सब एक ही रक्त के हैं। एक ही भाषा, एक ही संस्कृति और एक ही हमारी विरासत है। परन्तु उनके इन विचारों को अन्य राजनैतिक दल के तत्कालीन नेताओं ने अन्यथा रूप से प्रचारित-प्रसारित किया। बावजूद इसके लोगों के दिलों में उनके प्रति अथाह प्यार और समर्थन बढ़ता गया

इस दौरान उमाशंकर सिंह, , राघवेंद्र प्रताप सिंह दिव्या जायसवाल ,संदीप गुप्ता आशु, अभिषेक मिश्रा, विजय विश्वकर्मा, मनोज जायसवाल ,अरविंद मोदनवाल, सारांश केसरी ,शुभम मोदनवाल, प्यारे सोनकर, रवि गुप्ता ,बबलू चौहान, सुशील पांडे ,कृष्णानंद चौहान मौजूद रहे

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