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परमात्मा और जीव का मिलन ही रासलीला- कथावाचक

 


चहनियां।चंदौली। लोक मीडिया। भगवान श्री कृष्ण की गोकुल व ब्रज में की गयी लीला हम मनुष्यों के लिए आदर्श है। कुछ लोग भगवान को इन लीलाओं के लिए अपशब्दों की बौछार भी करते हैं।जबकि परमात्मा और जीव का मिलन ही रासलीला है।उक्त बातें मारूफपुर में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ समारोह में सोमवार को तीसरे दिन की कथा सुनाते हुए कथा वाचक रत्नेशाचार्य जी महाराज ने कही।उन्होंने कहा कि अपने माता पिता ही हम मनुष्यों के लिए वास्तविक देवता है। जो पुण्य और सुख माता पिता की सेवा में मिलती है वहल किसी देव मन्दिर में दर्शन पूजन से नहीं मिलती है। किन्तु इस समय इसका अभाव दिख रहा है। उन्होंने कहा कि हर प्राणी के जिह्वा में सरस्वती का वास होता है।यदि सच्चे हृदय से भगवान को पुकारा जाय तो वे जरूर हमारी मदद करते हैं। उन्होंने अजामिल और गणिका की कथा सुनाते हुए कहा कि ब्राह्मण अपने तपस्या के बल पर ही पृथ्वी के देवता कहलाते रहे और आज भी कुछ ऐसे ही ब्राह्मण हैं जिनसे पृथ्वी का संतुलन बना हुआ है। उन्होंने बताया कि स्त्रियों की अवहेलना से मनुष्य गर्त की तरफ जाता है।इसलिए मनुष्य को पत्नी की को गिरने से बचाना चाहिए और पत्नी को पति को पतन से बचाना ही कर्तव्य है। कथा श्रवण करने वालों में मुख्य रूप से सूबेदार मिश्र, अमरनाथ मिश्र, विद्याधर मिश्र, जग्गन मिश्र, दुर्गेश पाण्डेय, राधे श्याम बरनवाल, राजेश यादव, रामाश्रय चौरसिया, मोनू मिश्र, नीरज मिश्र, सुशील मिश्र सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

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