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राष्ट्रसेवा,और मानव सेवा ही जिंदगी है - पायल सोनी

                       पायल सोनी
कोरोना एक वैश्विक संकट है जिससे लगभग पूरी दुनिया जल्द से जल्द राहत पाना चाहती है।आपाधापी भरी जिंदगी में लोग छुट्टियों को तरसते थे,आज जब ढेर सारा समय है तो वक़्त ही नही कट पाता। ऐसी स्थिति में प्रमिलादेवी फाउंडेशन की फॉउंडर और अध्यक्ष व मोटिवेशनल स्पीकर पायल सोनी का मानना है कि इस वक़्त को व्यर्थ न जाने दें।हम सौभाग्यशाली है कि हमे ऐसे फुरसत के पल मिले है। बस करना यह है कि इस लॉकडाउन के वक़्त को काटना नही है बल्कि जीना है। वो सब कुछ करना है जो बहुत कुछ पीछे छूट गया है। पायल सोनी ने काशी की धरती में जन्म लिया है और इसे ही कर्मभूमि मानती है।संघ परिवार के संस्कार है।यह जिस परिवार से है वहाँ की पांच पीढियां संघ परिवार से जुड़ी है।इसलिए भी इनके लिए हर बात से पहले देशहित,राष्ट्रसेवा,और मानव सेवा है।वह लेखिका के साथ अच्छी कवयित्री भी है,वह मां भी है और कुशल गृहिणी भी,उनके हाथों का बना पकवान भी बहुत ही स्वादिष्ट होता है,खासकर उनके हाथ की चाय और खिलाने का उनका निराला तरीका है।उन्होंने कई बच्चियों को बचाया है जो घर से या तो चली गई थी या गायब हो गई थी, कई टूटते रिश्तों को बचाया है,कई टूटी हुई महिलाओं को हिम्मत दी है।आगे बढ़ना सिखाया है।यह सब बातें केवल वही जानता है जिसकी इन्होंने मदद की है,जिसे वह सार्वजनिक करना जरूरी नही समझती,उनका मानना है कि यह बातें सिर्फ उसके लिए प्रेरक होनी चाहिए जिसे समस्या है।कुछ बाते सार्वजनिक नही की जाती इससे उस व्यक्ति की मान हानि होती है,जो बताने लायक लगता है उसे बता दिया जाता है।
तमाम मुश्किलें क्यों न हो वो हर काम हिम्मत से करती है वो भी बिना किसी निराशा के मुस्कुराते हुए,बिना किसी नकारात्मक भाव के साथ,लॉकडाउन शुरू होने के बाद में वह दुर्घटना की शिकार हुई और उनके पसली की हड्डी टूट गई। वह पूरी तरह से बेडरेस्ट पर है अभी भी,फिंर भी वह पूरी आत्मीयता के साथ काशी के सभी ज़रूरतमंद लोगो को ( जब भी फ़ोन आता है दिन हो या रात) अपने सहयोगियों से कह कर वह पका व कच्चा राशन पहुँचा रही है।और सख्त हिदायत दी है कि कोई भी फ़ोटो नही लेना है,क्योंकि यह समाजसेवा नही है यह ईश्वर द्वारा हम लोगो से कराई जा रही मानवसेवा है,और ईश्वर को किसी फ़ोटो की आवश्यकता नही है। पायल सोनी बेडरेस्ट पर होने के बावजूद भी किसी भी समस्या को बड़ी ही संजीदगी से हेंडिल कर है और आम जीवन मे करती भी है, चाहे वह किसी स्कूल की फीस वृद्धि का मामला हो या किसी गरीब साहित्यकार को जेल से रिहा करवाना हो।चाहे लेख लिखना हो, वह थकती नहीं है।फेसबुक लाइव वीडियो के माध्यम से लोगो को जागरूक कर रही हैं। साथ ही अपने फाउंडेशन की ओर से आम जनता के लिए ऑनलाइन क्रिएटिव टारगेट दे रही है जैसे स्पेशल डिश बनाना,गार्डनिंग, क्राफ्ट वर्क,स्केच,पेंटिंग,कविता,
प्रतियोगिता,संस्कार देने के लिए अपने माता -पिता के साथ,और जॉइंट फैमिली की फ़ोटो भेजने  का भी टारगेट दे रही है।
शनिवार को सुंदरकांड पढ़ने के लिए मोटिवेट कर रही है ,जिसमे आम जनता बढ़-चढ़ कर हिस्सा भी ले रही है।अभी तक 2 दिनों में देश के 6 बड़े शहरों और 7 जिलों जैसे कोलकाता,दिल्ली,मुंबई,
लखनऊ,वाराणसी,देवरिया,
गोरखपुर,प्रयागराज,चंदौली,
सैयदराजा,मिर्जापुर इत्यादि से लगभग 45 से  ऊपर प्रतिभागियों ने उनके फाउंडेशन को फ़ोटो और वीडियो भेजे है,और भेजने वालो को तत्काल डिजिटल सार्टिफिकेट फाउंडेशन की ओर से मेल,व्हाट्सअप,फेसबुक इत्यादि पर भेजा जा रहा है। पूछने पर की आप बेडरेस्ट पर होने के बावजूद इतना क्रिएटिव कैसे हो सकती है और दूसरों के लिए कैसे सोच सकती है?
तब उन्होंने बताया कि-"जो इंसान मानवहित ही सोचता है और इस जगत की रचना करने वाले के करीब होता है वह क्रिएटिविटी से भला दूर कैसे रह सकता है। मुझे दुसरो की निःस्वार्थ भाव से सेवा और मदद करने में अच्छा लगता है।मुझे लगता है ईश्वर ने मुझे इसी लिए भेजा है और मेरा प्रयास है कि मुझसे मदद मांगने वाला कभी खाली हाथ न जाये।
                        नन्दनी गुप्ता

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