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विश्वकर्मा महासभा ने भोजपुरी कवि बावला की स्मृति में आयोजित की सामाजिक समरसता व्याख्यानमाला



उमाशंकर मौर्य (संवाददाता)

 चकिया। तहसील क्षेत्र के सिकन्दरपुर गांव में ऑल इंडिया यूनाइटेड  विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के तत्वावधान में आज सिकंदरपुर स्थित राष्ट्रीय सेवा विद्यालय परिसर में भोजपुरी लोक साहित्य के तुलसी एवं विख्यात कवि व गीतकार स्वर्गीय राम जियावनदास बावला की स्मृति में आयोजित सामाजिक समरसता विषयक व्याख्यानमाला को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा ने कहा भगवान श्री राम सामाजिक समरसता के प्रतीक थे वह अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध खड़े हुए और न्याय का साथ दिया ।उन्होंने कहा भारत समर्पण एवं संस्कारों की  वंदनीय भूमि है जहां भगवान राम और कृष्ण जन्म लेते हैं यह वह भूमि है जहां राम जियावन दास बावला जैसे फकीर फक्कड़ वंचित भी अपने महान कृतित्व से परमात्मा के प्रिय और कृपा पात्र बन गए बावला जी के स्मरण मात्र से रामचरितमानस  स्वतः साकार हो उठती है। क्योंकि बावला जी ने राम को राज्याभिषेक के बदले बनवास मिलने के दृष्टांत का भोजपुरी भाषा शैली में अपने गीतों के माध्यम से जो वर्णन किया है वह अविस्मरणीय एवं अवर्णनीय है ।उन्होंने कहा श्री राम ने वनवास के दौरान उत्तर से दक्षिण तक विभिन्न जातीय वर्गों के मध्य परस्पर प्रेम और विश्वास की भावना का संचार किया निषादराज को गले लगा कर सामाजिक समरसता तथा शबरी के जूठे बेर खा कर  प्रेम और स्नेह का अनुपम  संदेश दिया समाज के पिछड़े दलित वंचित लोग भी सम्मान पूर्ण  जीवन के अधिकारी हैं  यह शिक्षा  श्री राम के जीवन का आदर्श है ।इसी प्रकार केवट को पारिश्रमिक देने की बात भी अत्यंत महत्वपूर्ण है बिना पारिश्रमिक दिए  किसी  भी श्रमिक से कार्य करवाना अन्याय एवं निर्धनों का शोषण है। उन्होंने कहा बावला जी का जीवन आदर्श  सामाजिक समरसता एवं परस्पर प्रेम की भावना से परिपूर्ण था सब में एक और एक में सब मिल जाएं यही सामाजिक समरसता है। व्याख्यानमाला में विचार व्यक्त करते हुए अन्य वक्ताओं ने सामाजिक  एकजुटता का संकल्प व्यक्त करते हुए कहा  सरकार की उपेक्षा के चलते बावला जी सरीखे विलक्षण मनीषियों एवं साहित्यकारों की विरासत विलुप्त होने की कगार पर है सरकार का ध्यान आकृष्ट करते हुए वक्ताओं ने कहा  बावला जी की प्रतिमा स्थापना के साथ ही उनकी थाती एवं स्मृति को संरक्षित व सुरक्षित रखने के लिए सरकारी स्तर पर समुचित प्रयास होना चाहिए। इस अवसर पर समरसता भोज का कार्यक्रम भी संपन्न हुआ। व्याख्यानमाला की अध्यक्षता श्री शिव लाल विश्वकर्मा एवं संचालन राजेश कुमार विश्वकर्मा उर्फ राजू कवि ने किया। विचार व्यक्त करने वाले लोगों में प्रमुख रुप से सर्वश्री श्रीकांत विश्वकर्मा जिला अध्यक्ष चंदौली डॉ प्रमोद कुमार विश्वकर्मा जिला अध्यक्ष मिर्जापुर नंदलाल विश्वकर्मा जिला अध्यक्ष बनारस सुरेश विश्वकर्मा लोचन विश्वकर्मा दीनदयाल विश्वकर्मा श्याम बिहारी विश्वकर्मा विजय विश्वकर्मा पत्रकार सेवानिवृत्त फौजी श्याम लाल विश्वकर्मा विमलेश विश्वकर्मा श्याम बहादुर विश्वकर्मा आशुतोष विश्वकर्मा राधेश्याम विश्वकर्मा बोदर विश्वकर्मा गिरधारी गिरधारी विश्वकर्मा पारसनाथ विश्वकर्मा डॉक्टर झारखंडे विश्वकर्मा  बालेश्वर विश्वकर्मा सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

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